Mahashivratri Puja Vidhi 2026: महाशिवरात्रि की पूजा सामान्य दिनों की शिव पूजा से कहीं अधिक विशिष्ट और फलदायी मानी जाती है, क्योंकि शास्त्रों के अनुसार इस रात्रि को किया गया अभिषेक, जाप और ध्यान सीधे महादेव तक पहुँचता है; इसलिए यदि आप विधि-विधान और शुद्ध अंतःकरण से पूजा करते हैं, तो भगवान शिव की कृपा अनिवार्य रूप से प्राप्त होती है।
Mahashivratri Puja Vidhi 2026
1. पूजा की पूर्व तैयारी और संकल्प (Morning Preparation & Vow)
महाशिवरात्रि के दिन ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटे पहले) में उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त होने के बाद, मन में भगवान शिव का ध्यान करते हुए स्नान करना चाहिए, और यदि संभव हो तो स्नान के जल में थोड़ा सा गंगाजल या काले तिल मिला लेने चाहिए, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इससे शरीर की न केवल बाहरी शुद्धि होती है, बल्कि आंतरिक पापों का भी शमन होता है। स्नान के पश्चात स्वच्छ और धुले हुए (अदि संभव हो तो बिना सिले) श्वेत या पीत वस्त्र धारण करके घर के पूजा स्थल या शिवालय में जाकर हाथ में थोड़ा सा जल, चावल और पुष्प लेकर यह संकल्प लेना चाहिए कि “हे परमपिता परमेश्वर! मैं (अपना नाम और गोत्र बोलें) आज महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर आपकी विशेष कृपा प्राप्ति और अपने समस्त पापों के नाश के लिए पूरे दिन निराहार व्रत और रात्रि जागरण का संकल्प लेता/लेती हूँ, जिसे आप निर्विघ्न पूर्ण कराएं।”
2. पूजन सामग्री का एकत्रीकरण (Essential Ingredients)
पूजा आरंभ करने से पूर्व आपको भगवान शिव की प्रिय वस्तुओं को एक थाली में सजा लेना चाहिए, जिनमें प्रमुख रूप से पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का मिश्रण), गंगाजल, बिल्वपत्र (बेलपत्र – जो तीन पत्तियों वाला और कटा-फटा न हो), धतूरा, भांग, मदार (आक) के पुष्प, सफेद चंदन, अक्षत (साबुत चावल), जनेऊ, कलावा, धूप, दीप, कपूर, नैवेद्य (मिठाई या फल) और पान का पत्ता शामिल हैं, क्योंकि शिवजी को प्रकृति से जुड़ी ये साधारण वस्तुएं ही सबसे अधिक प्रिय हैं।
3. अभिषेक की प्रक्रिया (The Process of Abhishek)
शिवलिंग का अभिषेक महाशिवरात्रि पूजा का सबसे महत्वपूर्ण अंग है; इसलिए सबसे पहले शिवलिंग को शुद्ध जल से स्नान कराएं, और फिर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का निरंतर जाप करते हुए पंचामृत से अभिषेक करें—पहले कच्चा दूध चढ़ाएं जो वंश वृद्धि का प्रतीक है, फिर दही चढ़ाएं जो जीवन में स्थिरता लाता है, उसके बाद घी चढ़ाएं जो शक्ति प्रदान करता है, फिर शहद चढ़ाएं जो वाणी में मिठास और चरित्र में मधुरता लाता है, और अंत में शक्कर चढ़ाएं जो सुख-समृद्धि की कारक है। पंचामृत स्नान के बाद शिवलिंग को पुनः शुद्ध गंगाजल से अच्छी तरह स्नान कराएं ताकि वे पूर्णतः स्वच्छ हो जाएं।
Download Image4. श्रृंगार और अर्पण (Decoration & Offerings)
अभिषेक पूर्ण होने के बाद शिवलिंग पर सफेद चंदन या भस्म से त्रिपुंड (तीन आड़ी रेखाएं) बनाएं, जो शिव के तीनों नेत्रों और तीनों लोकों का प्रतीक है, और फिर अक्षत (चावल) अर्पित करें जो अखंड सौभाग्य का सूचक है; इसके बाद भगवान शिव को अत्यंत प्रिय बेलपत्र (जिसकी चिकनी सतह शिवलिंग की ओर हो) अर्पित करें, क्योंकि स्कंद पुराण के अनुसार एक बेलपत्र अर्पण करने से तीन जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। तत्पश्चात धतूरा, भांग, मदार के फूल और इत्र आदि श्रद्धापूर्वक चढ़ाएं और अंत में जनेऊ तथा वस्त्र (कलावा) अर्पित करें।
5. धूप, दीप और नैवेद्य (Light & Food Offering)
समस्त सामग्री अर्पित करने के बाद सुगंधित धूप और गाय के घी का दीपक जलाएं, और भगवान को भोग (नैवेद्य) के रूप में मौसमी फल (जैसे बेर), मिठाई या खीर अर्पित करें; ध्यान रहे कि शिवजी को केतकी का फूल और तुलसी पत्र वर्जित है, इसलिए इनका प्रयोग भूलकर भी न करें। भोग लगाने के बाद एक पान के पत्ते पर लौंग, इलायची और सुपारी रखकर ‘तांबूल’ के रूप में उन्हें समर्पित करें।
6. महाशिवरात्रि की चार प्रहर पूजा (Four Prahars Puja)
महाशिवरात्रि की रात्रि को चार प्रहरों (हिस्सों) में बांटा गया है और विशेष फल प्राप्ति के लिए इन चारों प्रहरों में अलग-अलग द्रव्यों से अभिषेक करने का विधान है—पहले प्रहर (शाम 6 से 9) में दूध से अभिषेक करें, दूसरे प्रहर (रात 9 से 12) में दही से, तीसरे प्रहर (रात 12 से 3) में घी से, और चौथे प्रहर (सुबह 3 से 6) में शहद से अभिषेक करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, जिससे धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है।
7. आरती और क्षमा प्रार्थना (Conclusion)
पूजा के अंत में परिवार सहित भगवान शिव की आरती (जैसे “जय शिव ओंकारा…”) उतारें और अंत में हाथ जोड़कर क्षमा प्रार्थना अवश्य करें कि “हे प्रभु! मैं न तो मंत्र जानता हूँ, न क्रिया और न ही पूजा की विधि, मैं तो केवल आपकी शरण में आया हूँ; इसलिए मेरी इस पूजा में जो भी भूल-चूक हुई हो, उसे क्षमा करें और मेरी पूजा स्वीकार करें।”
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Download Imageमहाशिवरात्रि विशेष: क्या करें और क्या न करें (Do’s and Don’ts)
महाशिवरात्रि का व्रत और पूजन तभी पूर्ण फलदायी होता है जब हम शास्त्रों में बताए गए नियमों का कड़ाई से पालन करें; छोटी सी भूल भी पूजा के प्रभाव को कम कर सकती है, इसलिए नीचे दी गई बातों का विशेष ध्यान रखें।
✅ महाशिवरात्रि के दिन क्या करें (Do’s)
1. ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और संकल्प: महाशिवरात्रि के दिन सूर्योदय से पूर्व (ब्रह्म मुहूर्त में) उठकर पानी में काले तिल या गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए, क्योंकि यह न केवल शरीर की गंध और अशुद्धि को दूर करता है, बल्कि आपके औरा (Aura) को भी शुद्ध करता है; इसके बाद हाथ में चावल और जल लेकर पूरे दिन के उपवास और शिव भक्ति का दृढ़ संकल्प लेना अनिवार्य है।
2. सफेद या हल्के रंग के वस्त्र धारण करें: भगवान शिव को सादगी और शांति प्रिय है, इसलिए पूजा के समय सूती, रेशमी या लिनेन के साफ-सुथरे सफेद, पीले या आसमानी रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है, जो आपके मन को शांत रखने और सात्विक ऊर्जा को ग्रहण करने में मदद करते हैं।
3. चारों प्रहर की पूजा और अभिषेक: यदि संभव हो, तो महाशिवरात्रि की पूरी रात जागकर चारों प्रहर (शाम, रात, मध्यरात्रि और ब्रह्म मुहूर्त) में अलग-अलग द्रव्यों (दूध, दही, घी, शहद) से शिवलिंग का अभिषेक करें, क्योंकि शिवपुराण के अनुसार जो भक्त रात्रि के चारों पहर में पूजा करता है, उसे धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—चारों फलों की प्राप्ति होती है।
4. रात्रि जागरण (Night Vigil) का पालन: इस व्रत का सबसे महत्वपूर्ण नियम ‘जागरण’ है; इसलिए आलस्य और नींद का त्याग करके पूरी रात भगवान शिव के भजनों, मंत्रों (जैसे ‘ॐ नमः शिवाय’ या महामृत्युंजय मंत्र) और शिव कथाओं का श्रवण करते हुए जागते रहें, ताकि आपकी रीढ़ की हड्डी सीधी रहे और ऊर्जा का प्रवाह ऊपर की ओर (ऊर्ध्वगामी) हो सके।
5. सही बेलपत्र और अक्षत का चुनाव: शिवलिंग पर चढ़ाया जाने वाला बेलपत्र कहीं से भी कटा-फटा नहीं होना चाहिए और उसमें तीन पत्तियां अवश्य होनी चाहिए जो तीनों गुणों (सत्व, रज, तम) का प्रतीक हैं; इसी प्रकार, अक्षत (चावल) चढ़ाते समय ध्यान रखें कि चावल का एक भी दाना टूटा हुआ न हो, क्योंकि शिव पूजा में ‘पूर्णता’ का बहुत महत्व है।
🚫 महाशिवरात्रि के दिन क्या न करें (Don’ts)
1. वर्जित वस्तुओं का अर्पण (हल्दी, तुलसी, केतकी): भगवान शिव की पूजा में भूलकर भी हल्दी (क्योंकि यह सौंदर्य प्रसाधन है और शिव वैरागी हैं), तुलसी दल (जो शाप के कारण वर्जित है), केतकी का फूल (जिसने ब्रह्मा जी के झूठ में साथ दिया था) और टूटे हुए चावल अर्पित न करें, क्योंकि इनका प्रयोग शिव पूजा में निषिद्ध माना गया है और इससे दोष लगता है।
2. काले वस्त्र पहनने से बचें: यद्यपि अघोरी साधना में काले रंग का महत्व है, परंतु गृहस्थ लोगों के लिए महाशिवरात्रि की पूजा में काले रंग के कपड़े पहनना अशुभ माना जाता है, क्योंकि यह शोक और नकारात्मकता का प्रतीक हो सकता है, इसलिए जहाँ तक संभव हो, शुभ और हल्के रंगों का ही प्रयोग करें।
3. शिवलिंग की पूरी परिक्रमा न करें: अक्सर लोग अज्ञानता में शिवलिंग की पूरी गोल परिक्रमा कर लेते हैं, जो कि गलत है; शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग की ‘जलहरी’ (जहाँ से पानी बहकर नीचे गिरता है) को कभी लांघना नहीं चाहिए, क्योंकि वह ऊर्जा का अत्यंत शक्तिशाली स्रोत है, इसलिए हमेशा आधी परिक्रमा (चंद्राकार) करके वापस लौट आना चाहिए।
4. तामसिक भोजन और नशे से दूरी: इस पवित्र दिन पर न केवल व्रत रखने वालों को, बल्कि घर के अन्य सदस्यों को भी प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा और किसी भी प्रकार के नशे (सिगरेट, तंबाकू) का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये चीजें मन में उत्तेजना और अशुद्ध विचार पैदा करती हैं जो आपकी साधना को खंडित कर सकती हैं।
5. दिन में सोना और क्रोध करना वर्जित: महाशिवरात्रि के दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति को दिन में सोने से बचना चाहिए क्योंकि इससे व्रत का प्रभाव क्षीण हो जाता है; इसके अलावा, घर में किसी भी प्रकार का कलह, झूठ बोलना, बड़ों का अपमान करना या क्रोध करना इस दिन महापाप माना जाता है, इसलिए मन को पूर्णतः शांत रखें।
🍎 फलाहार और खान-पान के नियम (Dietary Rules)
- क्या खाएं: व्रत में आप कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, समा के चावल, आलू, शकरकंद, दूध, दही, लस्सी और सभी प्रकार के फलों का सेवन कर सकते हैं; नमक के स्थान पर केवल सेंधा नमक (Rock Salt) का ही प्रयोग करें।
- क्या न खाएं: किसी भी प्रकार का अनाज (गेहूं, चावल, दाल), साधारण नमक, बेसन और मैदा खाना इस व्रत में पूर्णतः वर्जित है।
महाशिवरात्रि पूजा चेकलिस्ट 2026
✅ तैयारी और सामग्री (Essentials)
◻️ ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और व्रत संकल्प
◻️ श्वेत (सफेद) या हल्के रंग के वस्त्र
◻️ बेलपत्र (बिना कटा-फटा, 3 पत्ती वाला)
◻️ साबुत अक्षत (बिना टूटे चावल)
◻️ गंगाजल और पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
◻️ धतूरा, भांग, मदार के फूल, भस्म/चंदन
| ✨ क्या करें (Do’s) | ❌ सख्त मना है (Big Don’ts) |
| ‘ॐ नमः शिवाय’ का निरंतर जप | काला कपड़ा पहनना |
| शिवलिंग का विधिवत अभिषेक | शिवलिंग पर हल्दी या सिंदूर चढ़ाना |
| रात्रि जागरण (पूरी रात जागना) | तुलसी और केतकी का फूल चढ़ाना |
| केवल आधी परिक्रमा (चंद्राकार) करें | शिवलिंग की जलहरी को लांघना |
| मन शांत रखें और दान करें | दिन में सोना, गुस्सा करना या झूठ बोलना |
निष्कर्ष:
संक्षेप में कहें तो महाशिवरात्रि केवल मूर्ति पूजा का दिन नहीं है, बल्कि यह अपनी आत्मा को परमात्मा से जोड़ने, अपनी इंद्रियों पर विजय प्राप्त करने और जीवन को पशुवत प्रवृत्तियों से ऊपर उठाकर देवत्व की ओर ले जाने का एक स्वर्णिम अवसर है।









